विभु प्रतिष्ठान
ई दसम अछि
पद 4 आ 5
बुद्धिज्ञानमसमोहः क्षमा सत्यम दम्ममः सम। सुनिश्च भाववम भयवम चब्बमेव।। 10-4। अहिंसा समथा तुष्टिकरण दोना यशोयशया। भावम माता एवं विद्याविधा।। 10-5।
अनुवाद
.. 10. 4. बुद्धि, ज्ञान, आसक्तिक अभाव, क्षमा, सत्य, दमा (इन्द्रिय संयम), शमा (मानसिक संयम), सुख, दुख, जन्म आ मृत्यु, भय आ अभ्यास...। 10. 5. अहिंसा, समता, संतुष्टि, तपस्या, दान। एहि प्राणीसभक विभिन्न भावना, जेना सफलता आ असफलता, हमरा द्वारा प्रकट होइत अछि।
पद 12 आ 13
अर्जुन उवाचन। परम ब्रह्म परम धाम पवित्र परम तमहा। पुरुषम सास्वतम दिव्यमादिदेवमाजम्भ विभुम।। 10-12। अहस्तमुष्यः सर्वे देवसिरनारद। असिटो देवलो व्यासः स्वयं शैव ब्राविशी मे। 10-13।
अनुवाद
.. 10.12। अर्जुन कहलनिः अहाँ परम ब्रह्म, परम निवास आ परम पवित्र छी। अनन्त दिव्य व्यक्ति, देवताक सेहो आदिम देवता, अजन्मा आ सर्वव्यापी...। 10.13 ई बात सभ ऋषि लोकनि अहाँ सभ केँ कहैत छथि। तहिना देवर्षी नारद, असीता, देवला ऋषि आ व्यास सेहो हमरा कहैत छथि।
पद 26 आ 27
अश्वथः नारदः सब गाछ आ देवताक। गांधर्वक चित्ररथः कपिलो मुनिः सिद्धक।
अनुवाद
.. 10.26। हम सभ गाछमे अश्वथ (पीपल) आ देवर्षिसभमे नारद छी। हम गन्धर्वमे चित्रारथ आ सिद्ध पुरुषमे कपिल मुनि छी। 10.27। हमरा जानि लिअ, घोड़ामे अमृतसँ उत्पन्न उच्चैश्रव नामक घोड़ा, हाथीमे ऐरावत, आ मनुष्यमे राजा।
श्लोक 28 आ 29
आयुधनम वज्रम धेनुनामास्मी कामधुका। प्रज्ञानास्मी कन्दरपाः सर्वनामास्मी वासुकी।। 10-28। अनन्तासामी नागास वरुणा यादसमहम।। पितानामार्यम चास्मी यमः श्याममातामहम।। 10-29।
अनुवाद
.. 10.28। हम हथियारमे वज्र आ धेनु (गाय) मे कामधेनू छी, हम सृष्टिमे कन्दरपा (कामदेव) आ नागमे वासुकी छी...। 10.29। हम नागामे अनन्त (शेषनाग) आ जल देवतामे वरुण छी। हम पूर्वजसभमे आर्यम आ नियमक सभमे यम छी।
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