विभु प्रतिष्ठान - श्लोक श्लोक 40
विभु प्रतिष्ठान
श्लोक 40
अन्ततः हम दिव्य देवताक साक्षात्कारमे आबि गेल छी।
अनुवाद
.. 10.40। ओह प्रिय! हमर दिव्य अभिव्यक्तिक कोनो अन्त नहि अछि। अपन अभिव्यक्तिक ई विस्तार हम एक देशसँ संक्षेपमे कहि चुकल छी।
अन्ततः हम दिव्य देवताक साक्षात्कारमे आबि गेल छी।
.. 10.40। ओह प्रिय! हमर दिव्य अभिव्यक्तिक कोनो अन्त नहि अछि। अपन अभिव्यक्तिक ई विस्तार हम एक देशसँ संक्षेपमे कहि चुकल छी।
पवित्र श्लोककेँ दुनियाक सङ्ग साझा करबाक लेल सुन्दर, सिनेमाई वीडियोमे बदलि दियौक। अपन पृष्ठभूमि चुनू, मंत्र ऑडियो जोड़ू, आ आधुनिक प्रारूपमे गीताक प्रकाशकेँ फैलाउ।
एहि सुविधासभ लेल ऐप डाउनलोड करू
नित्य गीताक पूर्ण संस्करणक सङ्ग सिनेमाई आध्यात्मिक यात्राक शुरुआत करू। उच्च गुणवत्ता वाला मंत्र, प्रामाणिक अनुवाद, आ अपन हाथ के हथेली मे एक शांतिपूर्ण ध्यान अभयारण्य।
अहाँक योगदान हमरा सभकेँ गीताक ज्ञान सभकेँ, सर्वत्र उपलब्ध कराबयमे मदति करैत अछि।
कोनो यूपीआई ऐपसँ स्कैन करू
जी. पी. ए., फोनपे, पेटीएम, आदि