कर्मसंगम
अथ पाञ्च पहाड़ी
पद 8 आ 9
नावाया किछु मानसिक तत्व अछि। देखू, ई 5-8 अछि। प्रलापञ्जनाणिमिनिमिनिमिनिमिनिमिनिमिनिमिनिमिनिमिनिमिनिमिनिमिनिमिनिमिनिमिनिमिनिमिनिमिनिमिनिमिनिमिनिमिनिमिनिमिनिमिनिमिनिमिनिमिनिमिनिमिनिमिनिमिनिमिनिमिनिमिनिमिनिमिनिमिनिमिनिमिनिमिनिमिनिमिनिमिनिमिनिमिनिमिनिमिनिमिनिमिनिमिनिमिनिमिनिमिनिमिनिमिनिमिनिटम। कामुकता मानैत। 5-9।
अनुवाद
.. 5. आध्यात्मिक व्यक्ति सोचेगा (अर्थात, जानि) जे "हम मात्र कोनो क्रिया नहि करैत छी" देखैत, सुनैत, स्पर्श करैत, सूँघैत, खाइत, चलैत, सुतैत, साँस लैत...। 5. 9. आँखि खोलब आ बन्द करब (ओ) निश्चित रूपसँ जनैत अछि जे सभ इन्द्रिया अपन-अपन विषयमे घुमैत अछि।
पद 27 आ 28
बाहरक दिस देखय बला जीवित आँखि।।।।।।।।।।।।
अनुवाद
.. 2. 27। आँखि के दृष्टि भौंह के बीच मे राखि कऽ, बाहरी वस्तु के बाहर राखि कऽ, आ नासिका मे घुमैत प्राण आ पेट के हवा के संतुलित कऽ कऽ.... 2. 28। एक व्यक्ति जकर इन्द्रिय, मन आ बुद्धि संयमित अछि, एहन मोक्ष परायण ऋषि इच्छा, भय आ क्रोधसँ रहित छथि, ओ सर्वदा स्वतन्त्र रहैत छथि।
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