कर्मसंगम - श्लोक पद 26

कर्मसंगम

पद 26

काम-कृद्वियुक्तस यतन-यचेतसम। अभितो ब्रह्म-निर्वाण विद्याात्मा छथि। 5-26।

अनुवाद

.. 2. 26। मोक्ष (वा ब्रह्मानंद) सभ जगह ओहि लोक सभक लेल प्रचलित अछि जे वासना आ क्रोधसँ मुक्त छथि, जे संयमी छथि आ जे आत्माकेँ जनैत छथि।

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