कर्मसंगम - Verse पद 27 आ 28
पद 27 आ 28
बाहरक दिस देखय बला जीवित आँखि।।।।।।।।।।।।
Translation
.. 2. 27। आँखि के दृष्टि भौंह के बीच मे राखि कऽ, बाहरी वस्तु के बाहर राखि कऽ, आ नासिका मे घुमैत प्राण आ पेट के हवा के संतुलित कऽ कऽ.... 2. 28। एक व्यक्ति जकर इन्द्रिय, मन आ बुद्धि संयमित अछि, एहन मोक्ष परायण ऋषि इच्छा, भय आ क्रोधसँ रहित छथि, ओ सर्वदा स्वतन्त्र रहैत छथि।