गीता ध्यान - Verse श्लोक 6
श्लोक 6
भीष्मद्रोनात जयद्रथजल गंधारनीलोतापल शालयग्रहवती कृपेनाई कर्णे वेलकुल अश्वत्थामा विक्रण घोरमकरा दुर्योधनवती सोथिरन कालू पाण्डवई रणनाडी कैवर्तकः केशवः
Translation
पाण्डव लोकनि भीष्म आ द्रोणक दू कातसँ अभेद्य चट्टान, जयद्रथक जल, गान्धारक कारी चट्टान, शल्यक मगरमच्छ, कृपाक धारा, कर्णक ज्वार, अश्वत्थामा आ विकर्णक भयानक शार्क, आ दुर्योधनक बवंडर कैवर्तक देवताक आदेश पर पार कयलनि।