गीता ध्यान - श्लोक पद 7

गीता ध्यान

पद 7

परसार्यवचनः सरोजाममलम गीतरथगंडोट्टकदम नानाख्यनकसर हरिकथाअड्ड्रेसरः लोके सज्जनशतपधैराहः पैपियामनम मुदा भुयादभरतपंकजम कालीमलप्रधवम्सीः श्रेयसे।

अनुवाद

कमलक फूल जे महाभारत अछि, हमर कालीमलमकेँ शुद्ध सरसोसँ भरि दैत अछि जे ऋषि पराशरक पुत्र व्यासक शब्द अछि, गीताक सुगन्ध, लिली जे विभिन्न आख्यान अछि, भगवान कृष्णक सु-वर्णित कथा, भृंग जे दुनियाक प्राणी अछि, प्रतिदिन आबि मधु पिबैत अछि।

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