ज्ञान-विज्ञान - श्लोक पद 5
ज्ञान-विज्ञान
पद 5
अपार्यमितष्ठान प्रकृति विधि में परम। जीवभूतन महाबाहो येय्यद धर्यात जगत। 7-5।
अनुवाद
.. 7. 5। ओ प्यारी! ई प्रकृति अछि। एकर अतिरिक्त, हमर जीवन-सदृश स्वभाव केँ जानि लिअ, जाहि सँ ई संसार बनल रहैत अछि।
अपार्यमितष्ठान प्रकृति विधि में परम। जीवभूतन महाबाहो येय्यद धर्यात जगत। 7-5।
.. 7. 5। ओ प्यारी! ई प्रकृति अछि। एकर अतिरिक्त, हमर जीवन-सदृश स्वभाव केँ जानि लिअ, जाहि सँ ई संसार बनल रहैत अछि।
पवित्र श्लोककेँ दुनियाक सङ्ग साझा करबाक लेल सुन्दर, सिनेमाई वीडियोमे बदलि दियौक। अपन पृष्ठभूमि चुनू, मंत्र ऑडियो जोड़ू, आ आधुनिक प्रारूपमे गीताक प्रकाशकेँ फैलाउ।
एहि सुविधासभ लेल ऐप डाउनलोड करू
नित्य गीताक पूर्ण संस्करणक सङ्ग सिनेमाई आध्यात्मिक यात्राक शुरुआत करू। उच्च गुणवत्ता वाला मंत्र, प्रामाणिक अनुवाद, आ अपन हाथ के हथेली मे एक शांतिपूर्ण ध्यान अभयारण्य।
अहाँक योगदान हमरा सभकेँ गीताक ज्ञान सभकेँ, सर्वत्र उपलब्ध कराबयमे मदति करैत अछि।
कोनो यूपीआई ऐपसँ स्कैन करू
जी. पी. ए., फोनपे, पेटीएम, आदि