क्षेत्र-क्षेत्रज्ञविभागयोग - श्लोक श्लोक 22

क्षेत्र-क्षेत्रज्ञविभागयोग

श्लोक 22

पुरुषः प्रकृतिस्थो हि भुङ्क्ते प्रकृतिजान्गुणान् |

कारणं गुणसङ्गोऽस्य सदसद्योनिजन्मसु ||१३-२२||

अनुवाद

।।13.22।। प्रकृति में स्थित पुरुष प्रकृति से उत्पन्न गुणों को भोगता है। इन गुणों का संग ही इस पुरुष (जीव) के शुभ और अशुभ योनियों में जन्म लेने का कारण है।।

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