Sacred Scripture

गीता महात्म्य

8 Sections
गीता महात्म्य

पद 1

गीता शास्त्रमे पुण्य, जे विष्णुक मार्ग अछि, पद्मावप्नोति, दुष्टताक भयः

Translation

जे लगनसँ एहि पवित्र गीता शास्त्रक अध्ययन करैत अछि ओ विष्णुक नाम पर सभ भय आ फूलसँ मुक्त होइत अछि।

गीता महात्म्य

पद 2

गीता-ध्यानशिल्य प्राणायाम-परस्य पापीक जन्मसँ पूर्व होइत अछि।

Translation

जे व्यक्ति प्रतिदिन गीताक पाठ करैत अछि आ प्राणायामक अभ्यास करैत अछि, ओकर पूर्व जीवनक पाप सेहो नष्ट भऽ जाइत अछि आ नव पाप उत्पन्न नहि होइत अछि।

गीता महात्म्य

पद 3

माल निर्मोचन पूम्सम जलस्ननम, दैनिक गायन आ स्नान, संसारमलानसम।

Translation

मनुष्य अपन शरीरसँ अशुद्धि निकालबाक लेल प्रतिदिन स्नान करैत छथि। मुदा यदि अहाँ भगवद गीताक पवित्र जलमे मात्र एक बेर स्नान करैत छी तँ ई वाणी-पर्वतकेँ नष्ट कऽ दैत अछि।

गीता महात्म्य

श्लोक 4

गीता सुगिता कर्तव्य किमान्याः धर्मशास्त्रीय व्याख्या या पद्मनाभस्य मुखापद्मिनिह्रता स्वयं

Translation

भगवद गीताक गहन अध्ययन करबाक चाही। एते रास शास्त्र किएक अछि जखन कि भगवद गीता अछि जे विष्णुक मुखपत्रसँ निकलैत अछि?

गीता महात्म्य

पद 5

भरतामृत सर्वस्वम विष्णुवक्तद्विनहस्रुतम गीता गङ्गोडकम पीठव पुनर्जन्म नहि अछि।

Translation

गीताक पवित्र गङ्गाक जल, महाभारतक सार आ स्वयं भगवान विष्णुक शिक्षा पीएलासँ कोनो पुनर्जन्म नहि होइत अछि।

गीता महात्म्य

श्लोक 6

एकम शास्त्र देवकीपुत्र गीता-मेको देवो देवकीपुत्र एवेन्यू एकम मन्त्र नामनी अर्थात अपन देवताक लेल कर्मपायक सेवा

Translation

एकटा विज्ञान गीता अछि जकर उपदेश कृष्ण द्वारा देल गेल अछि, एकटा भगवान कृष्ण छथि, एकटा मंत्र हुनकर नाम अछि आ एकटा सेवा हुनकर सेवा अछि।

गीता महात्म्य

पद 7

शान्ताकरम भुजगसायनम पद्मनाभम सुरेश विश्वधरम गगनसद्रिशम मेघवर्णा शुभंगम लक्ष्मीकांतम कमलनायनम योगवीर ध्यानगाम्यम वंदे विष्णु च भयहरम सर्वलोकैकनाथ

Translation

हम विष्णुकेँ नमन करैत छी, जे शान्त छथि, सर्पपर विराजमान छथि, जकर नाभिमे कमलक फूल अछि, जे देवताक स्वामी छथि, जे दुनियाक सहारा छथि, जे आकाश जकाँ छथि, जे आकाशक रङ्ग छथि, जकर अङ्ग-प्रत्यङ्ग सुन्दर अछि, जे लक्ष्मीपति छथि, जकर आँखि पद्मनायनक अछि, जे योगीक ध्यानसँ प्राप्त होइत छथि, जे समस्त दुनियाक एकमात्र रक्षक छथि, जे भयकेँ दूर करैत छथि।

गीता महात्म्य

श्लोक 8

ब्रह्मा, वरुणेन्द्र, रुद्रमृत, स्थुंवंती, दिव्य, स्थायी, वेद, संगपदक्रम, पानीषादिर, संगम, ध्यान, स्वतंत्रगतेन, मानस, योगिनु, यंत्र, विदु, सूरसुर्गण, देवय, तमस, नमः।

Translation

हम भगवानकेँ नमस्कार करैत छी जिनका ब्रह्मा, वरुण, रुद्र आ वायु दिव्य भजनक सङ्ग स्तुति करैत छथि, जिनका विषयमे समगन वैदिक उपनिषदक वचनक सङ्ग गबैत छथि, जिनका ज्ञानी योगी ध्यानमे पालन करैत छथि, जकर महिमाकेँ देवता आ राक्षस नहि जनैत छथि।

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