गीता महात्म्य - श्लोक पद 2

गीता महात्म्य

पद 2

गीता-ध्यानशिल्य प्राणायाम-परस्य पापीक जन्मसँ पूर्व होइत अछि।

अनुवाद

जे व्यक्ति प्रतिदिन गीताक पाठ करैत अछि आ प्राणायामक अभ्यास करैत अछि, ओकर पूर्व जीवनक पाप सेहो नष्ट भऽ जाइत अछि आ नव पाप उत्पन्न नहि होइत अछि।

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