गीता महात्म्य - श्लोक पद 3

गीता महात्म्य

पद 3

माल निर्मोचन पूम्सम जलस्ननम, दैनिक गायन आ स्नान, संसारमलानसम।

अनुवाद

मनुष्य अपन शरीरसँ अशुद्धि निकालबाक लेल प्रतिदिन स्नान करैत छथि। मुदा यदि अहाँ भगवद गीताक पवित्र जलमे मात्र एक बेर स्नान करैत छी तँ ई वाणी-पर्वतकेँ नष्ट कऽ दैत अछि।

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