गीता महात्म्य - श्लोक श्लोक 8

गीता महात्म्य

श्लोक 8

ब्रह्मा, वरुणेन्द्र, रुद्रमृत, स्थुंवंती, दिव्य, स्थायी, वेद, संगपदक्रम, पानीषादिर, संगम, ध्यान, स्वतंत्रगतेन, मानस, योगिनु, यंत्र, विदु, सूरसुर्गण, देवय, तमस, नमः।

अनुवाद

हम भगवानकेँ नमस्कार करैत छी जिनका ब्रह्मा, वरुण, रुद्र आ वायु दिव्य भजनक सङ्ग स्तुति करैत छथि, जिनका विषयमे समगन वैदिक उपनिषदक वचनक सङ्ग गबैत छथि, जिनका ज्ञानी योगी ध्यानमे पालन करैत छथि, जकर महिमाकेँ देवता आ राक्षस नहि जनैत छथि।

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