ध्यान - श्लोक पद 13 आ 14

ध्यान

पद 13 आ 14

विषुव स्थिर अछिः रिफ्लेक्सिव नासिका अपन दिस इशारा करैत अछि।। शान्त आत्मा अतीतमे स्थित अछि, ब्रह्मा रथमे।

अनुवाद

.. 2. 23। शरीर, माथ आ गर्भाशय ग्रीवाक समान आ स्थिर धारण करैत, अपन नासिका छिद्रक अग्र भागकेँ बिना दोसर दिशामे देखैत अछि.... 2. 24। (साधक) केँ शान्त विवेक, निडर आ ब्रह्मचारीमे बेसबाक चाही, मनकेँ नियन्त्रित करबाक चाही, मनकेँ हमरा पर लागू करबाक चाही आ हमरा अंतिम लक्ष्यक रूपमे सोचबाक चाही।

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