ध्यान - श्लोक पद 11 आ 12

ध्यान

पद 11 आ 12

नाट्टुचिट्टा नाटिनिचा चलजिनकुशोत्तरम। 6-11। यतचित्तेन्द्रियाक्रियः। उपविश्यासना युनज्योद्योगमात्मविशुद्धिये। 6-12

अनुवाद

.. 6. 11. शुद्ध (स्वच्छ) जमीन पर कुश, चिड़ियाघर आ कपड़ाक संग अपन सीट न बहुत ऊँच आ न बहुत नीचा राखि कऽ.... 2. 62। ओतऽ (आसनमे बसि) मनकेँ एकाग्र करू, मन आ इन्द्रियाक क्रियाकेँ नियन्त्रित कऽ आत्मशुद्धिक लेल योगक अभ्यास करू।

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