कर्मयोग - श्लोक श्लोक 39
कर्मयोग
श्लोक 39
परिवेष्टित ज्ञानमे ओहि ज्ञानक अनन्त प्रकृति रहैत अछि।
अनुवाद
.. 3. 39. ओ प्यारी! ज्ञान कामरूपक एहि अनन्त शत्रु, ज्ञानी द्वारा आच्छादित अछि, जकरा आगि जकाँ संतुष्ट करब कठिन अछि।
परिवेष्टित ज्ञानमे ओहि ज्ञानक अनन्त प्रकृति रहैत अछि।
.. 3. 39. ओ प्यारी! ज्ञान कामरूपक एहि अनन्त शत्रु, ज्ञानी द्वारा आच्छादित अछि, जकरा आगि जकाँ संतुष्ट करब कठिन अछि।
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