जोनिंग-जोनिंग - Verse पद 8,9,10,11,12
पद 8,9,10,11,12
अमानित्व-माद्योगित्व-महिन्सा-शान्तिरार्जवम। आचार्यपासना-शौचा स्थायी-सत्वविनिग्रह। इन्द्रियमे वैराग्य-मानहङ्कर-आ-च। जन्म-मृत्यु-जरवयाधि-समुद्दोशनुदर्शनम। असक्तिरानाभिश्वंगा-पुत्रदार-गृहसु-सथान-च समचितत्व-मिष्टानी-शोपापतिशु। मायी-चन्यायोगेन भक्तिराव्याभिचारिनी। विविक्त-देसा-सेवित्व-मराठिराजन-संसधि। आध्यात्मिकज्ञान-तत्त्वज्ञानार्थदर्शनम्। आत्मज्ञानमिति प्रोक्टम-ज्योतिमान्यता।
Translation
.. 13. 8. अमानित्व, अदम्बित्व, अहिंसा, क्षमा, अर्जव, गुरुक सेवा, शुद्धि, स्थिरत आ आत्मसायम...। 13. 9. इन्द्रियाक विषय, अहंक अनुपस्थिति, जन्ममे दोष, मृत्यु, वृद्धावस्था, रोग आ शोकक प्रति वैराग्य...। 13.10। पुत्र, पत्नी, घर आदिमे आसक्ति आ अनाभिश्वङ्ग (पहिचानक अभाव); आ नीक आ अधलाके प्राप्तिमे समता...। 13.11। अन्ययोगक माध्यम सँ हमरा मे अव्यभिचारिनी भक्ति; एकान्त स्थान पर रहबाक आ (असाम्प्रदायिक) लोकक समुदायमे अनासक्तिक स्वभाव। 13.12। आध्यात्मिक ज्ञानमे अनन्तताक अर्थ अछि स्थिरता आ दर्शनक अर्थ अछि भगवानक दर्शन। एहि सभकेँ ज्ञान कहल जाइत अछि आ एकर विपरीत अज्ञानता कहल जाइत अछि।