राजविद्या राजगुह्ययोग - श्लोक श्लोक 11
राजविद्या राजगुह्ययोग
श्लोक 11
अवजानन्ति मां मूढा मानुषीं तनुमाश्रितम् |
परं भावमजानन्तो मम भूतमहेश्वरम् ||९-११||
अनुवाद
।।9.11।। समस्त भूतों के महान् ईश्वर रूप मेरे परम भाव को नहीं जानते हुए मूढ़ लोग मनुष्य शरीरधारी मुझ परमात्मा का अनादर करते हैं।।