अक्षर ब्रह्मयोग - श्लोक श्लोक 15

अक्षर ब्रह्मयोग

श्लोक 15

मामुपेत्य पुनर्जनम दुखालयमशास्वतम। नप्पुनवंती महात्मनः सँस्थीदिनी प्रमंगता।। 8-15।

अनुवाद

.. 8. 15. सर्वोच्च पूर्णता प्राप्त करैवला महात्मा लोकनि हमरा प्राप्त कयलाक बाद अनन्त दुख (गृहरूप) क रूपमे पुनर्जन्म नहि लैत छथि।

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