अक्षर ब्रह्मयोग - श्लोक श्लोक 14

अक्षर ब्रह्मयोग

श्लोक 14

Ananyacheta: सततत्तम यो मा स्मारति नित्याश | त्यासाह सुलाबाह: पार्त्ता नित्युयुक्षा योगिना | 8-14 |

अनुवाद

.. 8. 14. ओ प्यारी! हमरा स्मरण करय बला नित्य-युक्त योगीक लेल हम सुलभ छी, अर्थात सहजतासँ प्राप्त भऽ सकैत छी।

मात्र पढ़बासँ बेसी -
अपन ध्यान वीडियो बनाउ।

पवित्र श्लोककेँ दुनियाक सङ्ग साझा करबाक लेल सुन्दर, सिनेमाई वीडियोमे बदलि दियौक। अपन पृष्ठभूमि चुनू, मंत्र ऑडियो जोड़ू, आ आधुनिक प्रारूपमे गीताक प्रकाशकेँ फैलाउ।

एहि सुविधासभ लेल ऐप डाउनलोड करू

  • उच्च गुणवत्ता वाला पृष्ठभूमि कलाकृति
  • संस्कृत आ अर्थ पाठकेँ समन्वित कयल गेल
  • इमर्सिव चैन्टिंग आ संगीत
Video Generation Preview

गहन विसर्जनक अनुभव करू

नित्य गीताक पूर्ण संस्करणक सङ्ग सिनेमाई आध्यात्मिक यात्राक शुरुआत करू। उच्च गुणवत्ता वाला मंत्र, प्रामाणिक अनुवाद, आ अपन हाथ के हथेली मे एक शांतिपूर्ण ध्यान अभयारण्य।