ध्यान - श्लोक पद 43

ध्यान

पद 43

ओतऽ हुनका पूर्वदैहिकमक बुद्धि भेटैत अछि। जतऽ भुयाः विशुद्धु कुरुनन्दन। 6-43।

अनुवाद

.. 43. 43 ओ प्रिय स्वामी! ओतऽ मनुष्य, जे पूर्व शरीरमे अर्जित ज्ञानसँ सम्पन्न अछि, योगिक पूर्णता प्राप्त करबाक लेल आओर बेसी प्रयास करैत अछि।

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