मोक्षस्ययोग - श्लोक पद 57
मोक्षस्ययोग
पद 57
चेतस सर्वकारमणि माई सन्यास मतपराह। बुद्धियोगमुपश्रीतिय मचिताहः सततम भाव।। 18-57।
अनुवाद
.. 18.57। मनसँ सभ कर्मक त्याग कय, हमरा मे ध्यान कऽ, बौद्ध-योगक सहारा लऽ कऽ, अहाँ शाश्वत रूप सँ शुद्ध भऽ जाउ।
चेतस सर्वकारमणि माई सन्यास मतपराह। बुद्धियोगमुपश्रीतिय मचिताहः सततम भाव।। 18-57।
.. 18.57। मनसँ सभ कर्मक त्याग कय, हमरा मे ध्यान कऽ, बौद्ध-योगक सहारा लऽ कऽ, अहाँ शाश्वत रूप सँ शुद्ध भऽ जाउ।
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