मोक्षस्ययोग - Verse पद 55
पद 55
भक्तिमभिजनतीआस्मिटटटटट्वट्वट्वट्वट्वट्वट्वट्वट्वट्वट्वट्वट्वट्वट्वट्वट्वट्वट्वट्वट्वट्वट्वट्वट्वट्वट्वट्वट्वट्वट्वट्वट्वट्वट्वट्वट्वट्वट्वट्वट्वट्वट्वट्वट्वट्वट्वट्वट्वट्वट्वट्वट्वट्वट्वट्वट्वट्वट्वट्वट्वट्वट्वट्वट्वट्वट्वट्वट्वट्वट्वट्वट्वट्वट्वट्वट्वट्वट्वट्वट्वट्वट्वट्वट्वट्वट्वट्वट्वट्वट्वट्वट्वट्वट
Translation
.. 18.55। हमरा प्रति (ओहि) भक्तिसँ, ओ सैद्धांतिक रूपसँ जनैत छथि जे हम कतेक (व्याप्त) छी आ हम की छी। (एहि तरहेँ) सैद्धांतिक रूपसँ जानलाक तुरन्त बाद ई हमरा मे प्रवेश करैत अछि, अर्थात् मात्स्वरूप बनि जाइत अछि।