दैवासुर सम्पद्भिभागयोग - Verse पद 7
पद 7
एहि प्रवृत्तिमे सेवानिवृत्तिकेँ नहि जानब कोनो अधलाह विचार नहि अछि। शौचालयक आकार वा सत्य नहि जानि। 16-7
Translation
.. 16. 7. आसुरी स्वभावक लोक न वृत्ति जानैत छथि आ न निवृत्ति। हुनका सभमे न पवित्रता अछि, न सद्गुण अछि, न सत्य अछि।