दैवासुर सम्पद्भिभागयोग - श्लोक श्लोक 8

दैवासुर सम्पद्भिभागयोग

श्लोक 8

अश्यतम प्रतिष्ठा ते जगदहूरानीस्वरम। अप्रसम्प्रसम्भतम किमान्यातकमहायितुकम। 16-8।

अनुवाद

.. 16. 8. ओ सभ कहैत छथि जे ई संसार आश्रयहीन, असत्य आ भगवानसँ रहित अछि, जे एकर जन्म अन्तर-यौन सम्बन्ध (पुरुष आ महिलाक) सँ भेल अछि, आ एकर कारण की भऽ सकैत अछि?

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