पुरुषोत्तम योग - श्लोक पद 7

पुरुषोत्तम योग

पद 7

मन प्रकृतिक केन्द्र अछि। 15-7

अनुवाद

.. 15. 7. एहि जीवित सत्तामे हमर एकटा शाश्वत अंग एकटा जीवित सत्ता बनि गेल अछि। ई प्रकृति (मृत्युक समय) मे स्थित अछि आ पाँच इंद्रिय आ मन केँ अपन दिस आकर्षित करैत अछि, अर्थात ओकरा एकत्रित करैत अछि।

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