पुरुषोत्तम योग - श्लोक श्लोक 8
श्लोक 8
जँ शरीर साँस नहि लऽ सकैत अछि तँ एकरा क्रामतीश्वर कहल जाइत अछि।
अनुवाद
.. 15. 8. जखन ईश्वर (जीवित प्राणी) (एक शरीर सँ) पारगमन करैत अछि तखन ई (इन्द्रिय आ मन) के अवशोषित करैत अछि आ ओकरा दोसर शरीर मे पहुँचबैत अछि, जेना हवा सुगन्ध (फुलादी) के निवास सँ सुगन्ध के परिवहन करैत अछि।