पुरुषोत्तम योग - श्लोक श्लोक 8

पुरुषोत्तम योग

श्लोक 8

जँ शरीर साँस नहि लऽ सकैत अछि तँ एकरा क्रामतीश्वर कहल जाइत अछि।

अनुवाद

.. 15. 8. जखन ईश्वर (जीवित प्राणी) (एक शरीर सँ) पारगमन करैत अछि तखन ई (इन्द्रिय आ मन) के अवशोषित करैत अछि आ ओकरा दोसर शरीर मे पहुँचबैत अछि, जेना हवा सुगन्ध (फुलादी) के निवास सँ सुगन्ध के परिवहन करैत अछि।

मात्र पढ़बासँ बेसी -
अपन ध्यान वीडियो बनाउ।

पवित्र श्लोककेँ दुनियाक सङ्ग साझा करबाक लेल सुन्दर, सिनेमाई वीडियोमे बदलि दियौक। अपन पृष्ठभूमि चुनू, मंत्र ऑडियो जोड़ू, आ आधुनिक प्रारूपमे गीताक प्रकाशकेँ फैलाउ।

एहि सुविधासभ लेल ऐप डाउनलोड करू

  • उच्च गुणवत्ता वाला पृष्ठभूमि कलाकृति
  • संस्कृत आ अर्थ पाठकेँ समन्वित कयल गेल
  • इमर्सिव चैन्टिंग आ संगीत
Video Generation Preview

गहन विसर्जनक अनुभव करू

नित्य गीताक पूर्ण संस्करणक सङ्ग सिनेमाई आध्यात्मिक यात्राक शुरुआत करू। उच्च गुणवत्ता वाला मंत्र, प्रामाणिक अनुवाद, आ अपन हाथ के हथेली मे एक शांतिपूर्ण ध्यान अभयारण्य।