गुणा विभाजन - श्लोक पद 18

गुणा विभाजन

पद 18

राजास ऊपर जा रहल छथि आ सत्त्वस्तामे रहि रहल छथिः। घृणित गुण नीचा जा रहल अछि आ तमसामे रहि रहल छथिः।। 14-18।।

अनुवाद

.. 14.18। सत्वगुण धारण कयने पुरुष उच्चतर (लोक) दिस जाइत छथि। राजाक पुरुष मध्य (मन लोक) मे रहैत छथि आ तमोगुणक बहुत हीन प्रवृत्ति वला लोक नीचा धरि पहुँचैत छथि।

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