अक्षरब्रह्मयोग - श्लोक श्लोक 23

अक्षरब्रह्मयोग

श्लोक 23

यत्र काले त्वनावृत्तिमावृत्तिं चैव योगिनः |

प्रयाता यान्ति तं कालं वक्ष्यामि भरतर्षभ ||८-२३||

अनुवाद

।।8.23।। हे भरतश्रेष्ठ ! जिस काल में (मार्ग में) शरीर त्याग कर गये हुए योगीजन अपुनरावृत्ति को, और (या) पुनरावृत्ति को प्राप्त होते हैं, वह काल (मार्ग) मैं तुम्हें बताऊँगा।।

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