राजविद्या राजगुह्ययोग - Verse पद 26
पद 26
पात फूलि फूलमे बदलि जाइत अछि आ तखन भक्त ओकर प्रार्थना करैत अछि।
Translation
.. 9. 26. जे कोनो भक्त भक्ति सँ हमरा पत्र, फूल, फल, पानि आदि अर्पित करैत अछि, हम ओहि शुद्ध भक्तक भक्ति प्रसाद (पात्र पुष्पदी) स्वीकार करैत छी।