राजविद्या राजगुह्ययोग - श्लोक पद 13
राजविद्या राजगुह्ययोग
पद 13
महात्मनास्तु माँ पार्थ दैवी प्रकृतिमाश्र्त। भजन्त्यान्यमान्सो ज्ञानी भूताडिमव्यम। 9-13।
अनुवाद
.. 9. 13. ओ प्यारी! मुदा दिव्य प्रकृतिक रक्षक महात्मा पुरुष, हमरा सभ भूतक आदिम आ अनन्त रूप मानैत, एकटा अद्वितीय दिमागसँ हमरा गले लगबैत छथि।