राजविद्या राजगुह्ययोग - Verse पद 12
राजविद्या राजगुह्ययोग
पद 12
मोघाशा मोघकर्मो मोघजनाना विचेताः। राक्षसिमासुरी शैव प्रकृति मोहिनी श्रुति।। 9-12
Translation
.. 9. 12. व्यर्थ आशा मे, व्यर्थ कर्म मे, आ व्यर्थ ज्ञान मे, अविवेकी राक्षस आ असुरक मोहक स्वभाव के धारण करैत अछि।