अक्षर ब्रह्मयोग - श्लोक श्लोक 28

अक्षर ब्रह्मयोग

श्लोक 28

वैदिक यज्ञमे तप (तपस्या) आ शैव-दान (शाकाहार) सबसँ महत्वपूर्ण फल अछि।

अनुवाद

.. 8. 28. ई सब (दुनू मार्गक सार) केँ बुझैत योगी वेदमे वर्णित सभ सद्गुण-अध्ययन, त्याग, तपस्या, आ दान-केँ पार करैत सर्वोच्च स्थान आद्या (शाश्वत) प्राप्त करैत छथि।

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