ज्ञानकर्मस्योग - श्लोक पद 18

ज्ञानकर्मस्योग

पद 18

कर्मण्यकर्म जे नीक काज करबाक क्रिया अछि। ई बुद्धिमान मनुष्य द्वारा नीक काज करबामे सम्मिलित अछि।

अनुवाद

.. 4. 48। जे व्यक्ति काज मे निष्क्रियता आ काज मे निष्क्रियता देखैत अछि, ओ सबसँ बुद्धिमान व्यक्ति अछि। योगी सभ कर्मक कर्ता छथि।

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