ज्ञानकर्मस्योग - श्लोक पद 19

ज्ञानकर्मस्योग

पद 19

यास सर्व समरंभाः कामसंकल्प वर्जितः। ज्ञान अग्नितगधाकरम तमाहु पण्डितम बुद्धः। 4-19।

अनुवाद

.. 4. 19. जाहि व्यक्तिक कर्म इच्छा आ दृढ़ संकल्पसँ रहित होइत अछि, जकर कर्म ज्ञानक आगिसँ भस्म भऽ जाइत अछि, हुनका ज्ञान पंडित कहल जाइत अछि।

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