कर्मयोग - श्लोक श्लोक 4

कर्मयोग

श्लोक 4

न त कर्मनामरनामारनास्करमाया पुरुशनामनमानुयुनुयुनुयुनुयुनुयुनुयुनुयुनुयुनुयुनुयुनुयुनुयुनुयुनुयुनुयुनुयुनुयुनुयुनुयुनुयुनुयुनुयुनुयुनुयुनुयुनुयुनुयुनुयुनुयुनुयुनुयुनुयुनुयुनुयुनुयुनुयुनुयुनुयुनुयुनुयुनुयुनुयुनुयुनुयुनुयुनुयुनु

अनुवाद

.. 3. 4। कर्मक निर्वहनसँ मनुष्य निष्काम्यता प्राप्त नहि करैत अछि, आ कर्मक त्यागसँ सिद्धी (पूर्णता) प्राप्त नहि करैत अछि।

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