गणना - श्लोक पद 18
गणना
पद 18
दिनक अन्तमे, शरीर चिरस्थायी उपभोक्ता अछिः शरीर।
अनुवाद
.. 2. 18. एहि अविनाशी अमर अनन्त आत्माक ई सभ शरीर नाशवान कहल जाइत अछि। ई भारत अछि! लड़ो..
दिनक अन्तमे, शरीर चिरस्थायी उपभोक्ता अछिः शरीर।
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