श्रद्धात्रय विभायोग - Verse श्लोक 28
श्लोक 28
अनजानेमे दत्त तपस्या कयलनि। तपस्वीक मतलब ई अछि जे पार्थ या ततप्रेत्य जेहन कोनो चीज नै छैक।
Translation
.. 17.28। ओह प्रिय! यज्ञ, दान, तपस्या, आ निर्बाध रूपसँ कयल गेल कर्मकेँ 'असत' कहल जाइत अछि। ओ सभ न एहि संसार (एहि) मे लाभप्रद अछि आ न मृत्युक बाद (ओहि संसार)।