विश्वरूपन्योग - श्लोक पद 31

विश्वरूपन्योग

पद 31

कथामे चरित्रक नाम देववर प्रसिद्ध अछि। हम चाहैत छी जे अहाँ ई जानि लिअ जे लोकप्रिय होयबाक स्वभाव अहाँक नहि अछि।

अनुवाद

.. 11.31। (कृपया) हमरा कहू, "अहाँ के छी, सबसँ उग्र रूप वाला?" ओ सर्वोच्च भगवान! नमस्कार, अहाँ प्रसन्न रही। प्राथमिक रूपसँ हम अहाँ (तत्वसँ) केँ जानना चाहैत छी, किएक तँ हम अहाँक प्रवृत्ति (अर्थात् उद्देश्य) केँ नहि बुझैत छी।

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