विश्वरूपन्योग - श्लोक पद 29

विश्वरूपन्योग

पद 29

ज्वाला जतऽ तेज होइत अछि, पतड़्ग ओतऽ समृद्ध होइत अछि आ वक्ता ओतऽ समृद्ध होइत अछि।

अनुवाद

.. जेना पतङ्ग अपना केँ नष्ट करबाक लेल धधकैत आगि मे प्रवेश करैत अछि, तहिना ई लोक सेहो अपना केँ नष्ट करबाक लेल अहाँक मुँह मे प्रवेश करैत अछि।

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