अक्षरब्रह्मयोग - श्लोक श्लोक 26
श्लोक 26
शुक्लकृष्णे गती ह्येते जगतः शाश्वते मते |
एकया यात्यनावृत्तिमन्ययावर्तते पुनः ||८-२६||
अनुवाद
।।8.26।। जगत् के ये दो प्रकार के शुक्ल और कृष्ण मार्ग सनातन माने गये हैं । इनमें एक (शुक्ल) के द्वारा (साधक) अपुनरावृत्ति को तथा अन्य (कृष्ण) के द्वारा पुनरावृत्ति को प्राप्त होता है।।