अक्षर ब्रह्मयोग - श्लोक पद 26

अक्षर ब्रह्मयोग

पद 26

Suklakrushna gati hayate jagat: शाश्वते में | एक या त्यात्यानवर्तिमन्यायवर्ते | 8-26 |

अनुवाद

.. 8. 26. दुनियाक ई दू प्रकारक शुक्ल आ कृष्ण मार्ग अनन्त मानल जाइत अछि। एहिमेसँ एकटा (शुक्ल) गैर-पुनरावृत्ति (साधक) दिस लऽ जाइत अछि आ दोसर (कृष्ण) पुनरावृत्ति दिस लऽ जाइत अछि।

मात्र पढ़बासँ बेसी -
अपन ध्यान वीडियो बनाउ।

पवित्र श्लोककेँ दुनियाक सङ्ग साझा करबाक लेल सुन्दर, सिनेमाई वीडियोमे बदलि दियौक। अपन पृष्ठभूमि चुनू, मंत्र ऑडियो जोड़ू, आ आधुनिक प्रारूपमे गीताक प्रकाशकेँ फैलाउ।

एहि सुविधासभ लेल ऐप डाउनलोड करू

  • उच्च गुणवत्ता वाला पृष्ठभूमि कलाकृति
  • संस्कृत आ अर्थ पाठकेँ समन्वित कयल गेल
  • इमर्सिव चैन्टिंग आ संगीत
Video Generation Preview

गहन विसर्जनक अनुभव करू

नित्य गीताक पूर्ण संस्करणक सङ्ग सिनेमाई आध्यात्मिक यात्राक शुरुआत करू। उच्च गुणवत्ता वाला मंत्र, प्रामाणिक अनुवाद, आ अपन हाथ के हथेली मे एक शांतिपूर्ण ध्यान अभयारण्य।