ज्ञानविज्ञानयोग - श्लोक श्लोक 30
श्लोक 30
साधिभूताधिदैवं मां साधियज्ञं च ये विदुः |
प्रयाणकालेऽपि च मां ते विदुर्युक्तचेतसः ||७-३०||
अनुवाद
।।7.30।। जो पुरुष अधिभूत और अधिदैव तथा अधियज्ञ के सहित मुझे जानते हैं, वे युक्तचित्त वाले पुरुष अन्तकाल में भी मुझे जानते हैं।।