ज्ञानकर्मसन्यासयोग - श्लोक श्लोक 3
ज्ञानकर्मसन्यासयोग
श्लोक 3
स एवायं मया तेऽद्य योगः प्रोक्तः पुरातनः |
भक्तोऽसि मे सखा चेति रहस्यं ह्येतदुत्तमम् ||४-३||
अनुवाद
।।4.3।। वह ही यह पुरातन योग आज मैंने तुम्हें कहा (सिखाया) क्योंकि तुम मेरे भक्त और मित्र हो। यह उत्तम रहस्य है।।