विभूतियोग - श्लोक श्लोक 26 और 27

विभूतियोग

श्लोक 26 और 27

अश्वत्थः सर्ववृक्षाणां देवर्षीणां च नारदः |

गन्धर्वाणां चित्ररथः सिद्धानां कपिलो मुनिः ||१०-२६||

उच्चैःश्रवसमश्वानां विद्धि माममृतोद्भवम् |

ऐरावतं गजेन्द्राणां नराणां च नराधिपम् ||१०-२७||

अनुवाद

।।10.26।। मैं समस्त वृक्षों में अश्वत्थ (पीपल) हूँ और देवर्षियों में नारद हूँ; मैं गन्धर्वों में चित्ररथ और सिद्ध पुरुषों में कपिल मुनि हूँ।। ।।10.27।। अश्वों में अमृत से उत्पन्न हुए उच्चैश्रवा नामक अश्व, हाथियों में ऐरावत और मनुष्यों में राजा मुझे ही जानो।।

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