राजविद्या राजगुह्ययोग - श्लोक श्लोक 4
राजविद्या राजगुह्ययोग
श्लोक 4
हम नहि चाहैत छी जे दुनियाक सभ ब्रह्माण्ड अहाँ जकाँ होअय। हम चाहैत छी जे दुनियाक सभ ब्रह्माण्ड अहाँ जकाँ होय।
अनुवाद
.. 9. 4. ई पूरा संसार हमरा (भगवान) के अप्रकट रूप सँ व्याप्त अछि। हमरा मे केवल भूत अछि मुदा हम ओकरा मे नहि छी।