राजविद्या राजगुह्ययोग - श्लोक पद 1

राजविद्या राजगुह्ययोग

पद 1

श्रीभगवानूचचा। एतऽ अहाँ छी, सबसँ गहन प्रवक्ष्यमन्यसुव। ज्ञान आ विज्ञानक संग यज्ञत्व मोक्षसँ शुद्ध होइत अछि। 9-1।

श्रीभगवानुवाच

अनुवाद

.. 9. 1। श्रीभगवन कहलथिन, "अहाँ सभ जे अनसूया (दोष आ दृष्टिसँ रहित) छी, हम विज्ञानक सङ्ग ई गुप्त ज्ञान कहैत छी, ई जानि कऽ जे अहाँ संसार (सांसारिक बन्धन) सँ मुक्त रहब।"

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