कर्मसंगम - श्लोक पद 22
कर्मसंगम
पद 22
ई सभ सम्पर्कसँ भोगयवला कष्ट अछि।
अनुवाद
.. 5. 22. इन्द्रिया आ वस्तुक मिलनसँ उत्पन्न आनन्द दुःखक उद्देश्यक लेल होइत अछि, किएक तँ ओ आदिम आ परम होइत अछि। बुद्धिमान पुरुष ओहिमे नहि रहैत छथि।
ई सभ सम्पर्कसँ भोगयवला कष्ट अछि।
.. 5. 22. इन्द्रिया आ वस्तुक मिलनसँ उत्पन्न आनन्द दुःखक उद्देश्यक लेल होइत अछि, किएक तँ ओ आदिम आ परम होइत अछि। बुद्धिमान पुरुष ओहिमे नहि रहैत छथि।
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