ज्ञानकर्मस्योग - श्लोक पद 11

ज्ञानकर्मस्योग

पद 11

ई सभ हमर माता प्रपद्यन्ते तांतस्तथैव भजमयमक रूपमे छथि। हमर वर्तमान मानवः पार्थ सर्वशाय। 4-11

अनुवाद

.. 4. 11. 8 जे सभ हमरा सँ एहन प्रेम करैत अछि जेना हम करैत छी, हम हुनका सभ पर सेहो एहन कृपा करैत छी। हे पार्थ, सभ लोक हमर मार्ग पर चलि रहल छथि।

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