कर्मयोग - श्लोक पद 22
कर्मयोग
पद 22
ना मे पार्थस्ती कर्तव्यम त्रिशु लोकेशु किञ्चन। नानावप्तम वाप्तव्यम वार्ता आ कर्मणी। 3-22।
अनुवाद
.. 3. 22. यद्यपि त्रिलोक्यमे हमर कोनो कर्तव्य नहि अछि आ किछु नहि भेटैत छी (अवप्तव्य), हम कर्ममे रहैत छी।
ना मे पार्थस्ती कर्तव्यम त्रिशु लोकेशु किञ्चन। नानावप्तम वाप्तव्यम वार्ता आ कर्मणी। 3-22।
.. 3. 22. यद्यपि त्रिलोक्यमे हमर कोनो कर्तव्य नहि अछि आ किछु नहि भेटैत छी (अवप्तव्य), हम कर्ममे रहैत छी।
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